aadhi aabadi

  • Nov 28 2019 5:20PM

शादी कराकर बड़ी विधवा बहन को दी नयी जिंदगी

शादी कराकर बड़ी विधवा बहन को दी नयी जिंदगी

पंचायतनामा टीम
जिला: रांची 

कविता उम्र के लिहाज से काफी छोटी हैं. महज 18 साल की हैं. अभी स्नातक कर रही हैं. इसके बावजूद काफी संवेदनशील हैं. आपको यकीन नहीं होगा, लेकिन सिर्फ 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने मिथक तोड़ गांव-समाज को जीने की नयी राह दिखा दी. उन्होंने अपनी बड़ी विधवा बहन की शादी करायी. आज वह अपनी ससुराल में नया जीवन जी रही हैं. इसका पूरा क्रेडिट जाता है रांची के बुढ़मू की बिटिया कविता सिंह को.

नाम- कविता सिंह. उम्र-18 वर्ष, पीटीपीएस, कॉलेज, पतरातू से हिंदी ऑनर्स कर रही हैं. प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती भी हैं. पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन छोटी सी उम्र में इन्होंने सामाजिक बदलाव की मोटी लकीर खींच दी है. इसकी शुरुआत इन्होंने अपने घर से की. छोटी सी उम्र में विधवा हो चुकी अपनी बड़ी बहन का दुख इनसे देखा नहीं जा रहा था. वह हमेशा खुद में खोयी रहती थीं. इसी दौरान जीवन कौशल (लाइफ स्किल) के मिले प्रशिक्षण ने कविता की आंखें खोल दी. आखिरकार कविता ने अपनी दीदी की शादी कराकर उन्हें नया जीवन देने का निर्णय ले लिया. ग्रामीण इलाके में विधवा की शादी कराना इतना आसान भी नहीं था. यह जानकर भी छोटी सी उम्र में उन्होंने यह जिद ठान ली. आपको जानकर हैरत होगी कि इन्होंने अपने परिजनों के साथ-साथ अन्य को भी इसके लिए राजी कर लिया.

विधवा का जीवन मानो अभिशाप हो

जब कविता की बड़ी बहन की शादी काफी कम उम्र (15 वर्ष ) में हो रही थी, उस वक्त कविता का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नामांकन ही हुआ था. शादी के एक वर्ष बाद बड़ी बहन को एक पुत्र हुआ. इसके कुछ ही दिनों बाद पति का वर्ष 2016 में निधन हो गया. इस कारण बड़ी बहन अपने मायके में मां-पिता के साथ रहने लगीं. जब कविता छुट्टियों में अपने घर वापस आती थीं, तो वह काफी करीब से अपनी बड़ी बहन को देखती थीं कि कैसे वह अकेली अपने बच्चे की देखभाल कर रही हैं. किसी रीति-रिवाज और धार्मिक अनुष्ठानों में भी वह शामिल नहीं होती थीं.

घरवालों को सता रहा था समाज का भय

वर्ष 2015 में गैर सरकारी संस्था सेव द चिल्ड्रेन द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में पी एंड जी कार्यक्रम लॉन्च किया गया. सभी छात्राओं को जीवन कौशल का प्रशिक्षण दिया गया. इसमें कविता भी शामिल थीं. जब स्कूल से घर वापस आयीं, तो उन्होंने अपने माता-पिता से अपनी बड़ी बहन की दोबारा शादी को लेकर विमर्श किया. माता-पिता ने बात सुनी, लेकिन समाज का भय उन्हें सता रहा था. कविता ने परिजनों से भी बात करनी शुरू की. आखिरकार मार्च 2017 में विधवा बहन की शादी हो गयी.

जीवन कौशल का कमाल

सेव द चिल्ड्रेन (झारखंड) की कम्युनिकेशन एंड कैंपेन मैनेजर सौमी हलदर बताती हैं कि जीवन कौशल के प्रशिक्षण में बच्चियों को बाल अधिकार, लिंग भेद, घरेलू हिंसा, बाल विवाह और मानव तस्करी समेत अन्य मुद्दों को लेकर जागरूक किया जाता है.

अब विधवाओं की होने लगी शादी : कविता

कविता कहती हैं कि गर्मी की छुट्टियों में जब स्कूल से घर आती थी, तो दोस्तों को जीवन कौशल का प्रशिक्षण देती थी. अब गांव में बेझिझक विधवाओं की शादी होने लगी है. इस कुप्रथा को खत्म करना आसान नहीं था, लेकिन जीवन कौशल के प्रशिक्षण ने उनके जीने का नजरिया ही बदल दिया.