aadhi aabadi

  • Nov 19 2018 5:07PM

आजीविका पशु सखी बलमदीना को मिला झारखंड सम्मान

आजीविका पशु सखी बलमदीना को मिला झारखंड सम्मान

पंचायतनामा डेस्क

झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित समारोह में अनगड़ा (गेतलसूद) की पशु सखी बलमदीना तिर्की को झारखंड सम्मान से सम्मानित किया गया. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने बलमदीना तिर्की को प्रशस्ति पत्र, भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा, एक लाख रुपये का चेक और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. बलमदीना तिर्की अपने गांव और पंचायत में डॉक्टर दीदी के नाम से जानी जाती हैं. पशु सखी के तौर पर उन्होंने काफी बेहतर कार्य किया है, जिससे इलाके में पशु मृत्यु दर में काफी कमी आयी है. स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, पर्यटन मंत्री अमर कुमार बाउरी, स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चन्द्रवंशी, सांसद रामटहल चौधरी समेत कई गणमान्य मौजूद थे.

जूही महिला समूह से शुरू हुआ सफर
रांची जिले के अनगड़ा के सुदूर गांव गेतलसूद की रहनेवाली पांचवीं पास बलमदीना के पास पहले कोई रोजगार नहीं था. पति वाहन चालक हैं. बलमदीना के दो बच्चे जब बड़े हुए, तो पति की कमाई से घर चलाना मुश्किल था. इस बीच साल 2012 में बलमदीना जूही महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ गयीं. समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बदलाव का दौर शुरू हो गया. छोटी-मोटी जरूरतों के लिए समूह से लोन लेकर काम चलाने लगीं. समूह से जुड़ने के बाद समूह से जुड़े प्रशिक्षणों में भी शामिल होने लगीं. प्रशिक्षण पाने के बाद बलमदीना का आत्मविश्वास बढ़ा और आजीविका पशु सखी के तौर पर उनका चयन किया गया. समय-समय पर उन्हें बकरी पालन का भी प्रशिक्षण दिया गया.

आगे की राह थी कठिन
आजीविका पशु सखी का प्रशिक्षण पाने के बाद बलमदीना ने गांव में जाकर बकरियों को कृमिनाशक और टीका देने का काम शुरू किया. पर शुरुआती दौर में किसान बकरियों का इलाज कराने के लिए तैयार नहीं थे. उन्हें काफी समझाना पड़ता था. इसके अलावा दूसरे गांवों में भी जाना पड़ता था. सभी गांवों में पैदल जाकर इलाज करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन बलमदीना ने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम करती रहीं. इसका फायदा यह हुआ कि पशुपालकों में विश्वास जगा और वे बकरियों के बीमार होने पर बलमदीना की सेवा लेने लगे. बलमदीना बताती हैं कि अब बकरी के अलावा मुर्गी, सूकर, बैल और भैंस का प्राथमिक इलाज करने में वह सक्षम हैं.

डॉक्टर दीदी के नाम से मशहूर बलमदीना
सखी मंडल से जुड़ने के बाद पशु सखी के तौर पर बेहतर कार्य करते हुए बलमदीना तिर्की अपने लिए एक स्कूटी खरीदीं और गांव-गांव घूम-घूम कर पशुधन की सेवाएं देने लगीं. डॉक्टर दीदी के नाम से मशहूर बलमदीना पारा वेटनरी कैडर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं. अपने गांव के अलावा पंचायत क्षेत्र में वह बकरी, मुर्गी, बतख से जुड़ी वैक्सीनेशन, डिवार्मिंग समेत अन्य वेटनरी सुविधाएं मामूली फीस में उपलब्ध करा रही हैं. वह सखी मंडल की दूसरी महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का काम करती हैं. इनकी तरह ही और भी पशु सखी को झारखंड में तैयार किया गया है. इसी का परिणाम है कि अब बिहार की ग्रामीण महिलाओं को भी पशु सखी बनाने का जिम्मा झारखंड को सौंपा गया है. बलमदीना जैसी सैंकड़ों पशु सखी बिहार जाकर अपनी सेवाएं दे रही हैं.

इतनी सफलता मिलेगी, विश्वास नहीं था : बलमदीना तिर्की
झारखंड सम्मान से सम्मानित बलमदीना तिर्की ने झारखंड सरकार और जेएसएलपीएस के प्रति आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पशु सखी के तौर पर कार्य शुरू किया था, तब इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस काम के लिए उन्हें झारखंड सम्मान से सम्मानित किया जायेगा. उन्होंने कहा कि काफी मेहनत करके उन्होंने यह सफलता हासिल की है. अब और दोगुने उत्साह से गांव में जाकर कार्य करेंगी और महिलाओं को सखी मंडल से जुड़ने के लिए जागरूक करेंगी.