aadhi aabadi

  • May 4 2019 3:51PM

लालमुनि ने डुंगरीडीह को बनाया शराबमुक्त गांव

लालमुनि ने डुंगरीडीह को बनाया शराबमुक्त गांव

वीरेंद्र कुमार सिंह
प्रखंड: पोटका
जिला: पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा का एक गांव है डुंगरीडीह. अब इस गांव की अपनी पहचान है. इसी गांव की बहू लालमुनि के कारण डुंगरीडीह को लोग जानने लगे हैं. पूर्ण शराबबंदी को लेकर गांव की बहू लालमुनि ने संघर्ष छेड़ रखा है. गांव में शराब पीते या बनाते कोई मिल जाये, तो अब उसकी खैर नहीं. शराबियों से जहां जुर्माना वसूला जाता है. शराब पीकर गांव आने की सख्त मनाही है. संघर्ष का असर हुआ. अब ये गांव शराबमुक्त हो गया. डुंगरीडीह पोटका प्रंखड की भाटिन पंचायत में आता है. इस गांव में करीब चार सौ लोग रहते हैं.

पहले शाम ढलते ही गांव में शराबियों का लगता था जमावड़ा
एक समय था, जब डुंगरीडीह गांव में शराबियों का जमावड़ा लगा रहता था. खासकर शाम के समय तो स्थिति और भी खराब हो जाती थी. शराब के नशे में लोग हमेशा आपस में झगड़ा-झंझट करते थे. इतना ही नहीं, शराब पीने से करीब दो दर्जन से अधिक महिलाओं का सुहाग उजड़ चुका है.

अवैध शराब के खिलाफ लालमुनि का आंदोलन
शराब पीकर हमेशा झगड़ा-झंझट को देख चुकी लालमुनि ने गांव से हमेशा के लिए अवैध शराब को बंद करने का निर्णय लिया. शुरुआती समय में काफी परेशानी हुई. इसके बावजूद वह हिम्मत नहीं हारीं और आखिरकार ग्रामीणों को समझाने में सफल हुईं कि आपकी सबसे बड़ी परेशानी की जड़ शराब है. अब तो गांव में शराब पीकर आने या बेचने पर पूरी तरह से रोक है. अगर कोई शराब पीकर गांव आता है या कहीं अवैध रूप से शराब बनायी जाती है, तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जाता है. शराब के सेवन करनेवाले या बेचने वालों पर पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है. गांव में जुर्माना लगाने का असर दिखा और धीरे-धीरे अब यह डुंगरीडीह शराबमुक्त हो गया है.

ग्रामीणों के सहयोग से बना शराबमुक्त गांव
लालमुनि के पति सुखदेव सोरेन यूसिल में कार्यरत थे. शराब पीने के आदी होने के कारण 2009 में उनकी मौत हो गयी थी. पति की मृत्यु से लालमुनि टूट गयीं, लेकिन हिम्मत नहीं हारीं. अपने घर की ऐसी त्रासदी देख लालमुनि ने गांव से ही शराब को बाहर निकालने का फैसला किया, ताकि उनकी तरह अन्य किसी का घर नहीं उजड़े. उन्होंने गांव को शराबमुक्त करने का बीड़ा उठाया. हाथों में मशाल लेकर उन्होंने गांव की महिलाओं को एकजुट करना शुरू किया. पहले उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा. कई बार धमकी भी मिली, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की. धीरे-धीरे ग्रामीणों का समर्थन मिलने लगा और आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया. आखिरकार ग्रामीणों की मदद से डुंगरीडीह में अब शराब की दुर्गंध भी नहीं आती.

कई सामाजिक संस्थाओं ने किया सम्मानित
लालमुनि सोरेन सागेन महिला मंडल की अध्यक्ष हैं. इस महिला मंडल में सैंकड़ों ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो शराब के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती हैं. आसपास के गांव जैसे भाटिन, झरिया, तिलाइतांड़, मेचूआ आदि में जाकर लोगों को शराब के खिलाफ जागरूक भी करती हैं. उनके इस ऐतिहासिक कार्य के लिए कई सामाजिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित भी किया है. इसके अलावा श्रीकृष्ण मुरारी सेवा संस्थान द्वारा पूर्व मुखिया अनीता मुर्मू के हाथों सम्मानित भी हुई हैं.

लालमुनि का संकल्प आया काम : ग्राम प्रधान
डुंगरीडीह गांव के ग्राम प्रधान श्याम सोरेन कहते हैं कि इस गांव को पहले शराबियों के गांव के नाम से जाना जाता था, लेकिन लालमुनि के संकल्प ने गांव को पूरी तरह से शराब से मुक्त किया है. अब हम सब ग्रामीण प्रेमभाव से रहते हैं.

ग्रामीणों का हमेशा मिला सहयोग : लालमुनि
समाजसेवी लालमुनि ने कहा कि जिस प्रकार शराब ने मेरा सुहाग छीन लिया, अब किसी भी सुहागिन की मांग शराब के कारण न उजड़े, यही उनका संकल्प है. यहां के बच्चे भी शिक्षित हों. कहती हैं कि यह आंदोलन हम ग्रामीणों का है. इस गांव को शराबमुक्त बनाने में सभी सहयोग करते हैं.