aadhi aabadi

  • Mar 17 2020 4:30PM

ओलंपिक में लक्ष्मी ने किया देश का प्रतिनिधित्व

ओलंपिक में लक्ष्मी ने किया देश का प्रतिनिधित्व

वीरेंद्र कुमार सिंह
जिला : पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत धालभूमगढ़ प्रखंड की बागुला निवासी लक्ष्मी रानी मांझी को ओलंपिक (तीरंदाजी ) में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली झारखंड की पहली अनुसूचित जनजाति महिला होने का गौरव प्राप्त है. तीरंदाजी के लिए इन्हें दर्जनों पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. लक्ष्मी रानी ने अपनी मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया है कि कुछ करने की तमन्ना हो तो सफलता उसके कदम चूमती है.

रेलवे में हैं वेलफेयर इंस्पेक्टर
आज के दौर में महिलाएं किसी से कम नहीं हैं. वर्तमान में ये रेलवे चितरंजन में वेलफेयर इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थापित हैं. लक्ष्मी रानी मांझी के पिता यूसिल के नरवा प्रोजेक्ट में काम करते हैं. लक्ष्मी ने अपनी पढ़ाई-लिखाई पिता के साथ रहकर की. नरवा के समीप ही उच्च विद्यालय, केरो है जहां से लक्ष्मी ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की. राजेन्द्र इंटर कॉलेज,गोविंदपुर से इंटरमीडिएट तथा दुर्गापुर से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है.

नौवीं कक्षा में ही टाटा आर्चरी के लिए चयन
लक्ष्मी उच्च विद्यालय, केरो में जब नौवीं क्लास में थीं, तब टाटा आर्चरी की ओर से तीरंदाजी के लिए एक टीम स्कूल में आयी. 15 दिनों के प्रशिक्षण के बाद लक्ष्मी का टाटा आर्चरी के लिए चयन हो गया. इसके बाद से लक्ष्मी ने मुड़कर कभी पीछे नहीं देखा. किसी को यकीन नहीं था कि ग्रामीण क्षेत्र की एक साधारण परिवार की लड़की ओलंपिक में तीरंदाजी के लिए देश का प्रतिनिधित्व करेगी.

एकेडमी में कोर्स के बाद बनीं टाटा की कर्मचारी
टाटा आर्चरी ने दो साल का प्रशिक्षण देने के बाद लक्ष्मी को टाटा आर्चरी एकेडमी में 4 साल के लिए रखा, जहां तीरंदाजी का कोर्स कराया गया. इसके बाद टाटा स्टील ने इन्हें रख लिया और अब वह टाटा स्टील की कर्मचारी बन गयी थीं.

देश-विदेश में मिलें हैं मेडल
वह देश ही नहीं, विदेशों में भी तीरंदाजी में अपना प्रदर्शन करती रहीं. वर्ष 2004 में द्वितीय एशियन आर्चरी ग्रैंड प्रिक्स, क्वालालंपुर में 16 जून से 21 जून तक आयोजित खेल में बेहतर प्रदर्शन कीं. वर्ष 2006 में श्रीलंका के कोलंबो में लक्ष्मी को गोल्ड मेडल मिला. सर्व शिक्षा अभियान और यूनिसेफ द्वारा वर्ष 2007 के अपने कैलेंडर में लक्ष्मी रानी मांझी की तस्वीर को जगह दी गयी. 18 अगस्त से 28 अगस्त तक यह आयोजन चला था. वीमेंस टीम इवेंट में इन्हें गोल्ड मेडल मिला था. वर्ष 2007 में नई दिल्ली की गोइंग टू स्कूल संस्था ने लक्ष्मी मांझी पर शॉर्ट फिल्म बनायी. इसके बाद 10वां साउथ एशियन गेम कोलंबो वर्ष 2006 में इन्हें डिप्लोमा अवार्ड से नवाजा गया. नवंबर 2009 में इंडोनेशिया के बाली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में इन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. 2009 में कोलकाता में आयोजित चौथे एशियन ग्रैंड प्रिक्स में इन्हें गोल्ड मेडल मिला.

प्रधानमंत्री ने तीरंदाजों का बढ़ाया था हौसला
2016 में रियो में आयोजित 31वें ओलंपिक गेम्स में लक्ष्मी रानी मांझी को भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला. तब रियो डी जनेरियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से मिलकर उनका हौसला ही नहीं बढ़ाया था बल्कि बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं भी दी थीं. इन कलाकारों में भारतीय तीरंदाजी टीम की प्रशिक्षक जमशेदपुर की पूर्णिमा महतो, तीरंदाज लक्ष्मी रानी मांझी, दीपिका कुमारी व तीरंदाजी कोच हरेंद्र तिवारी शामिल थे. छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने लक्ष्मी को खेल एवं युवा कल्याण विभाग राज्य खेल अलंकरण सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया था. तीरंदाजी में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए यह सम्मान इन्हें दिया गया था.