aadhi aabadi

  • Jan 28 2018 2:31PM

झारखंड के पारंपरिक पकवानों से हुई अच्छी आमदनी

झारखंड के पारंपरिक पकवानों से हुई अच्छी आमदनी

 पंचायतनामा डेस्क


रांची के मोरहाबादी में आयोजित राष्ट्रीय खादी एवं सरस महोत्सव का समापन हो गया. यहां 22 राज्यों के करीब 1300 स्टॉल लगे थे. देसी खान-पान के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के परिधान देखने को मिले. डिजिटल इंडिया की थीम पर आयोजित इस मेले में लोगों ने खरीदारी की और कैशलेस लेनदेन भी किया. खादी मेले में झारखंड की महिलाओं द्वारा लगाया गया आजीविका कैफे आकर्षण का केंद्र रहा. इस कैफे के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों से आयी महिला समूह की महिलाओं ने राज्य के पारंपरिक खान-पान को नयी पहचान दिलाने की कोशिश की. इनके स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ थी. ग्राहकों ने बड़े ही चाव से झारखंड के लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया. इन स्टॉलों पर चावल से बना पीठा, मड़ुआ पीठा, धुसका, मकई रोटी, पकौड़ी, डुंबू जैसे पारंपरिक व्यंजन मिल रहे थे. सभी स्टॉल पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया था. मेले में आजीविका कैफे का संचालन कर रही दीदियों का उत्साह देखने लायक था. आजीविका मिशन की सहायता से संचालित विभिन्न महिला समूहों के स्टॉल मेले में लगाये गये थे. इन स्टॉल में बांस से बने घरेलू सामान के अलावा सजावट के सामान, महिला समूहों द्वारा बनाया गया अचार, पापड़, नमकीन, मड़ुआ निमकी समेत अन्य सामान खूब बिके. ग्रामीण महिलाओं को विकास से जोड़कर उनका, उनके परिवार और गांव का विकास करने का जो खाका तैयार किया गया था, वो काफी हद तक सफल दिखा. महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो रही हैं. जेएसएलपीएस द्वारा महिला समूह बना कर महिला समूहों को सही दिशा दी जा रही है.

आजीविका कैफे से अच्छी आमदनी : सुलोचना देवी
प्रगति कैटरिंग
पंचायत : सदमा
जिला : बोकारो

खादी मेले में 39 नंबर स्टॉल पर प्रगति कैटरिंग की महिला सदस्यों की दुकान थी. यह कैटरिंग प्रगति महिला मंडल, बोड़दाग द्वारा संचालित है. समूह की दो महिलाएं सुलोचना देवी और विमला देवी मेले में इस कैफे को चला रही थीं. कैफे में मेथी साथ की पकौड़ी, निमकी, चाय, खजूर, प्याज पकौड़ी और बैंगनी की खूब बिक्री हुई. सुलोचना देवी कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद अब काफी अच्छा लग रहा है. पहले घर के बाहर निकलने की भी छूट नहीं थी. अब काम को लेकर घर से बाहर निकलते हैं. इससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है. सुलोचना बताती हैं कि वो ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है, लेकिन समूह से जुड़ कर काफी कुछ सीख गयी हैं और आत्मविश्वास बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि समूह से जुड़े हुए अभी सिर्फ आठ महीने हुए हैं, पर इस दौरान बहुत कुछ सीखने को मिला है.

अब महिलाएं खुल कर करती हैं बात : प्रमिला देवी
एमइसी कैटरिंग
पंचायत : चंदाघासी
प्रखंड : नामकुम
जिला : रांची

लक्ष्मी महिला समूह द्वारा एमइसी कैटरिंग की दुकान 40 नंबर स्टॉल पर थी. इस स्टॉल पर पारंपरिक व्यंजन मिल रहे थे. इस आजीविका कैफे में चावल पीठा, मड़ुआ पीठा, पालक पीठा, लिट्टी चोखा और सारली सूप काफी बिके. कैफे का संचालन करने वाली सुषमा देवी ने बताया कि दूसरे गांव की महिलाओं के जरिये महिला समूह की जानकारी मिली थी. इसके बाद 10 महिलाओं के सहयोग से इस समूह का गठन किया गया. समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. पहले पैसों की जरूरत पड़ने पर महिलाओं को दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता था, पर अब पैसों की समस्या नहीं होती है. समूह से जुड़कर महिलाएं अब साफ-सफाई सीख गयी हैं. अब महिलाएं घर और बाहर साफ-सफाई रखती हैं. समूह से जुड़ कर महिलाओं का आत्मविश्वास जगा है. उनके रहन- सहन का तरीका बदल गया है. पहले महिलाएं अपनी बात कहने में संकोच करती थीं, पर अब महिलाएं खुल कर अपनी बात रखती हैं. मेले के बारे में पूछने पर सुषमा देवी कहती हैं कि मेले में झारखंड के पारंपरिक पकवानों की खूब मांग रही. ग्राहक बड़े ही चाव से इसे खा रहे थे.

बेहतर हो रही है महिलाओं की स्थिति : गीता देवी
पंचायत : बाढ़ू
प्रखंड : कांके
जिला : रांची

स्टॉल नंबर 41 पर लजीज कैटरिंग की दुकान थी. इस कैटरिंग को तीन महिला समूह की सदस्यों ने मिल कर खोला था. इस कैटरिंग में सरस्वती किसान महिला समिति, किसान महिला समूह और जागृति महिला समूह के सदस्य शामिल हैं. 2016 में इन सभी समूहों का गठन हुआ. समूह की सदस्य गीता देवी कहती हैं कि कांके ब्लॉक में भी उनका कैटरिंग चलता है. समूह की चार महिलाएं मिल कर कैटरिंग चलाती हैं. गीता देवी ने बताया कि समूह से जुड़ने और काम शुरू होने के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. पहले वो घर के बाहर नहीं जा पाती थीं, पर अब काम को लेकर वो बाहर जाती हैं. अब उनका जीवन पहले से बेहतर हो गया है. समूह की महिलाओं का हमेशा प्रयास रहा है कि अन्य महिलाओं की जिंदगी में एक सकारात्मक बदलाव लाया जा सके.

गरीबी दूर कर रहा महिला समूह : सरिता मुर्मू
प्रखंड : धालभूमगढ़
जिला : पूर्वी सिंहभूम

स्टॉल नंबर 42 पर मामुनी कैटरिंग की दुकान थी. इस कैटरिंग समूह में दो महिला समूह की महिलाएं सदस्य हैं. भारत माता महिला समूह और मामुनी महिला समूह के सदस्य इसमें शामिल थे. इस स्टॉल पर झारखंडी पकवान के साथ-साथ ओड़िशा के भी पारंपरिक पकवान बिक रहे थे. आजीविका कैफे का संचालन कर रही सरिता मुर्मू कहती हैं कि फरवरी 2016 में उन्हें महिला समूह की जानकारी मिली थी. इसके बाद वो समूह से जुड़ गयीं. समूह से जुड़ने से पहले वो पूरी तरह से बेरोजगार थीं. पैसों की जरूरत होने पर दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता था, पर महिला समूह से जुड़ने के बाद बैंक लिंकेज के जरिये जो पैसे मिले, उससे लोन लेकर कैफे की शुरुआत की. इससे उनके जीवन में काफी बदलाव आया है. समूह से जुड़कर अब महिलाएं व्यवसाय कर रही हैं और खुद को गरीबी से बाहर निकाल रही हैं. वह बताती हैं कि गांव में अच्छे तरीके से महिला समूह का संचालन हो रहा है.

आगे बढ़ रही हैं महिलाएं : मीना देवी
पंचायत : तारुप
प्रखंड : रातू
जिला : रांची

आनंदमयी सखी मंडल का कैफे स्टॉल नंबर 44 पर था, जहां पर समूह की महिलाएं झारखंड के पारंपरिक खान-पान के लिए एक नया बाजार तैयार कर रही थीं. इस कैफे का संचालन जिस कैटरिंग समूह के जरिये किया जा रहा था, उस समूह में चार महिला समूह की महिलाएं जुड़ी हैं. सरस्वती महिला समूह, जीवन शांति महिला समूह, किसान महिला समूह और रोशनी महिला समूह. कैफे का संचालन करने वाली मीना देवी ने बताया कि आठ नवंबर 2017 से इनका आजीविका कैफे रातू प्रखंड परिसर में चल रहा है. समूह से जुड़ने के बाद इनकी जिंदगी बदल गयी है. उन्होंने बताया कि कई महिलाएं पढ़ी- लिखी होने के बावजूद कुछ काम नहीं कर पा रही थीं, लेकिन महिला समूह से जुड़ने के बाद उन्हें एक अलग पहचान मिल गयी है. अब वह खुद पैसे कमाकर आगे बढ़ रही हैं.

अब परेशानी हो रही है दूर : सुनीता इंदवार
पंचायत : भरनो
प्रखंड : भरनो
जिला : गुमला

रोहिणी स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित रोहिणी कैटरिंग का कैफे खादी मेले के स्टॉल नंबर 46 पर लगा था. रोहिणी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भरनो प्रखंड परिसर में भी अपना आजीविका कैफे चलाती हैं. स्टॉल में सुनीता इंदवार और अंगनी उराइन ग्राहकों को झारखंडी खान-पान का स्वाद चखा रही थीं. मकई की रोटी के लिए इनके स्टॉल पर काफी भीड़ थी. सुनीता इंदवार कहती हैं कि भरनो प्रखंड परिसर में इनका कैफे अच्छा चल रहा था, लेकिन प्रखंड परिसर में ही एक अन्य महिला ने अपनी दुकान खोल दी, जो ब्लॉककर्मी की रिश्तेदार हैं, इसके कारण इनके कैफे की बिक्री में गिरावट आ गयी है. वह कहती हैं कि समूह से जुड़कर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है.

मधु से लेकर सब्जी उत्पादन में जुड़ी हैं महिलाएं

गारू मधु सह वनोत्पाद सहयोग समिति का स्टॉल भी मेले में लगा था. स्टॉल में बैठे संदीप ने बताया कि इस समिति से तीन सौ किसान जुड़े हुए हैं और सभी मधुमक्खी पालन करते हैं. इसके जरिये इनके जीवन में काफी सुधार हो रहा है. सिमडेगा से आये उदय ने भी बागवानी, फल- सब्जी उत्पादन सहयोग समिति का स्टॉल लगाया, जहां महिलाओं द्वारा बनाये गये अचार व पापड़ समेत अन्य कई तरह के उत्पाद बिक रहे थे. जातोम डुंगडुंग ने बताया कि इस समिति से जुड़ कर स्थानीय लोगों को काफी लाभ हो रहा है. वो अपने उत्पाद को बेच कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. टुंडी धनबाद से आयी मां काली आजीविका सखी मंडल की महिलाओं ने भी अपना स्टॉल लगाया था, जहां बांस से निर्मित सामान बिक रहे थे. मंगली देवी ने बताया कि वो अपने उत्पाद को धनबाद, फूलवारीटांड़ और गोविन्दपुर में जाकर बेचती हैं, जहां उसकी अच्छी मांग है. ओरमांझी प्रखंड की महिला समूह की महिलाओं ने भी अपने स्टॉल लगाये थे, जहां अगरबत्ती और सैनिटरी पैड्स की बिक्री की जा रही थी.