aadhi aabadi

  • Nov 8 2019 5:57PM

जेसोवा मेला : दीदियों के उत्पादों को मिला बाजार

जेसोवा मेला : दीदियों के उत्पादों को मिला बाजार

रांची के मोरहाबादी मैदान में जेसोवा मेले का आयोजन किया गया. इसमें देश के विभिन्न राज्यों के उद्यमियों ने स्टॉल लगाकर उत्पादों की बिक्री की. इस दौरान विभिन्न राज्यों की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिली. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि शिल्पकारों के घरों में खुशहाली आये, इसलिए मेले से खरीदारी जरूर करें. दीपावली में मिट्टी के ही दीये जलायें, ताकि कुम्हारों के घरों में भी समृद्धि आ सके. इस मेला के माध्यम से उन शिल्पकारों को उचित मंच मिलेगा, जिन्हें उत्पाद बेचने के लिए बाजार नहीं मिल पाता है. इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री ने जेसोवा को धन्यवाद दिया. 17-21 अक्तूबर, 2019 तक इस मेले का आयोजन हुआ

झारखंड की महिलाओं ने लगाया स्टॉल
मेला परिसर में प्रवेश करते ही दायीं तरफ झारखंड के स्टॉल लगाये गये थे. जेएसएलपीएस द्वारा संचालित महिला समूह की दीदियों ने स्टॉल लगाया था. इन स्टॉलों में उनके द्वारा बनाये गये उत्पादों की बिक्री हो रही थी. डोकरा आर्ट, बैग, रेशम की साड़ी, अचार, पापड़, शहद, बांस से निर्मित वस्तुओं के अलावा अन्य सामान बिक रहे थे. इसके अलावा बासुकी अगरबत्ती, तसर सिल्क के उत्पाद और लाह की चूड़ियों की भी अच्छी मांग थी.

महिलाओं की जिंदगी में आया बदलाव
लोहरदगा के सेन्हा प्रखंड की राजकुमारी कुजूर और रेशमा कुजूर जूट निर्मित उत्पाद बेच रही थीं. उन्नति जूट क्राफ्ट, सेन्हा के बैनर तले यह महिलाएं जूट के विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का निर्माण करती हैं. बिनको महिला मंडल की राजकुमारी देवी और कुसुम महिला मंडल की रेशमा कुजूर ने बताया कि इस काम में 10 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. एक वक्त था जब सभी महिलाएं खेती-बारी और मजदूरी करती थीं, लेकिन अब इस काम से जुड़ने के बाद सभी की जिंदगी बदल गयी है. उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है. उन्होंने बताया कि वो अपने उत्पाद को मेले में बेचती हैं. रांची के अलावा धनबाद में आयोजित मेले में भी स्टॉल लगा चुकी हैं. उनके उत्पादों की बिक्री अच्छी होती है और दाम भी अच्छे मिलते हैं.

तसर सिल्क उत्पाद का हब है रेशमनगर
गोड्डा जिले के भगैया रेशमनगर से आये आशीष ने बताया कि रेशमी वस्त्रों के निर्माण के कारण ही उनके गांव का नाम रेशमनगर पड़ा. उनके साथ स्टॉल में मौजूद भारतीय आजीविका सखी मंडल की सदस्य सुशीला देवी ने बताया कि रेशमनगर में लगभग 500 परिवार रहते हैं, जो तसर सिल्क का उत्पाद बनाते हैं. भगैया रेशमनगर झारखंड में तसर सिल्क उत्पाद का हब है. हथकरघा सिल्क के इस स्टॉल में रेशमी साड़ी, दुपट्टा और सलवार सूट की खूब बिक्री हुई. यहां के सिल्क उत्पाद में मधुबनी प्रिंटिंग की जाती है, जो इसे बेहद खास बना देता है. स्टॉल में भारतीय आजीविका सखी मंडल की महिलाओं द्वारा तैयार किये गये उत्पाद बिक रहे थे. समूह से 12 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों में अपना स्टॉल लगा चुकी हैं. मेला के माध्यम से अच्छी कमाई हो रही है, इससे इनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है.

झारखंड के बहुमूल्य उत्पाद
झारखंड की महिला समूह की स्टॉल पर लाह की चूड़ियां, लेमन ग्रास ऑयल और तुलसी पत्ते खूब बिक रहे थे. खूंटी के अनिगड़ा से आयी जूलियानी टोपनो ने बताया कि खूंटी में जेएसएलपीएस के सहयोग से लेमन ग्रास प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी है. वहां पर लेमन ग्रास की खेती की जाती है. इस कार्य से 12 समूह की महिलाएं जुड़ी हुई हैं. कुछ महिलाएं लेमन ग्रास की खेती भी करती हैं, तो कुछ प्रोसेसिंग के कार्य से जुड़ी हैं. लेमनग्रास का बाजार भी अच्छा है. झारखंड के अलावा राज्य के बाहर भी वो अपने उत्पाद बेच चुकी हैं. खूंटी के टकरा गांव से आयी बिकोला कच्छप लाह की चूड़ी बेच रही थीं. यहां लगभग 40 महिलाएं चूड़ी बनाने का कार्य करती हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है.

शक्ति महिला मंडल के उत्पाद
गुमला के रायडीह प्रखंड के छत्तरपुर मांझाटोली से आयी कुंती देवी और फूलवा देवी अचार, पापड़, तिलौरी और मसाला बेच रही थीं. शक्ति महिला मंडल अंतर्गत इन वस्तुओं का निर्माण किया जाता है. महिला मंडल से 10 महिलाएं जुड़ी हैं. सभी महिलाएं मिलकर सामान बनाती हैं. इसके लिए महिलाओं को वर्ष 2010 में प्रशिक्षण मिला था. महिलाएं सरस मेला और दीपावली मेला के अलावा गुमला जिले के सरकारी दफ्तर और एक-दो दुकानों में भी अपने उत्पाद बेचती हैं. इस काम को करते हुए महिलाओं की जिंदगी में बदलाव आ रहा है. आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है. कुंती देवी ने बताया कि वर्ष 2008 से महिलाएं इन उत्पादों को तैयार कर रही हैं.

अन्य जिलों का भी लगा स्टॉल
झारखंड के इन स्टॉलों में साहेबगंज के मंडरो प्रखंड की महिलाएं तसर सिल्क का उत्पाद बेच रही थीं. रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत सुगनू गांव की तिला देवी बांस का उत्पाद बेच रही थीं. तिला देवी रांची के अलावा दिल्ली और मुंबई में आयोजित मेलों में भी अपना उत्पाद बेच चुकी हैं. बोकारो से आयी ख्वाजा गरीब नवाज महिला समिति की रजिया बानो मेटल की चूड़ी बेच रही थीं. नगड़ी प्रखंड की सुनीता बागवार सोहराई पेंटिग का स्टॉल लगायी थीं. दुमका की मुटकी सोय बासुकी अगरबत्ती, पाकुड़ से आयी गुलबहार बीबी और अब्दुल रहीम ने हाथ से बुने हुए कपड़ों का स्टॉल लगाया था.