aadhi aabadi

  • Jun 6 2019 12:04PM

बंजर जमीन में ड्रिप इरिगेशन से कर रहे हैं खेती

बंजर जमीन में ड्रिप इरिगेशन से कर रहे हैं खेती

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: ओरमांझी
जिला: रांची

पानी के बिना जीवन अधूरा है. किसानों के लिए पानी की अहमियत और बढ़ जाती है, क्योंकि पानी के बिना खेती की बात बेमानी है. पानी की कीमत अन्नदाता किसानों से बेहतर कौन जान सकता है. राजधानी रांची स्थित ओरमांझी प्रखंड के किसान इस बात को बखूबी समझते हैं. ओरमांझी प्रखंड के किसानों की राज्यस्तरीय पहचान है. यहां के किसान खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं. अधिकतर किसान पढ़े-लिखे हैं और पानी की अहमियत समझते हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र के किसान ड्रिप इरिगेशन से खेती कर बूंद-बूंद पानी बचा रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसका महत्व समझा रहे हैं. इनका मानना है कि पानी बचा कर खेती करेंगे, तो बचे हुए पानी से और फसल उगा सकते हैं. जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने और कम पानी की खपत से खेती करने के बारे में किसानों को जागरूक किया जा रहा है. उन्हें आधुनिक सिंचाई प्रणाली टपक सिंचाई के लिए उपकरण भी उपलब्ध करा रहा है. बहुत से किसानों को इसका लाभ मिल रहा है. जेएसएलपीएस द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का लाभ दिलाया जा रहा है, जो योजना के तहत लाभ लेने की अर्हता रखते हैं

प्रखंड के 88 गांवों में बचेगा सिंचाई का पानी
झारखंड हॉर्टिकल्चर इंटेसिफिकेशन बाइमाइक्रो ड्रिप इरिगेशन प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2017 में ओरमांझी प्रखंड के 22 गांवों में बेहतर सिंचाई व्यवस्था के लिए माइक्रो ड्रिप इरिगेशन के उपकरण किसानों को दिये गये थे. योजना का उद्देश्य था कि किसानों को कृषि के लिए पानी की कमी नहीं हो. योजना के तहत किसान को 25 डिसमिल पर माइक्रो ड्रिप इरिगेशन उपकरण लगाने के लिए आर्थिक मदद दी गयी है. इसके लिए किसानों को ग्राम संगठन में 15,000 रुपये जमा करने पड़ते हैं, हालांकि किसान बाद में इस राशि को निकाल कर कृषि कार्य के लिए उपयोग कर सकते हैं. वर्ष 2017 से लेकर आज तक ओरमांझी में गांवों की संख्या बढ़ी है. फिलहाल 88 गांवों में यह योजना चल रही है. 88 गांवों के सभी किसानों को अब तक इसका लाभ नहीं मिल सका है. उन तक योजना का लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है.

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अब नहीं सूखता है कुएं का पानी
ओरमांझी और बारीडीह पंचायत के किसानों ने बताया कि पहले ड्रिप इरिगेशन नहीं रहने के कारण वो मुश्किल से एक फसल कर पाते थे, लेकिन अब उतने ही पानी में वो दो फसल आराम से निकाल लेते हैं और इससे पानी की भी बचत हो जा रही है. यह माइक्रो ड्रिप इरिगेशन का कमाल है. उकरीद के किसान बताते हैं कि पहले एक फसल की सिंचाई करने से अप्रैल महीने तक पानी सूख जाता था, पर अब पानी बच जाता है. यहां के अधिकतर किसानों ने इस बार तरबूज की खेती की है और उससे लाखों कमा रहे हैं. तरबूज की खेती के लिए बहुत पानी की जरूरत होती है, पर ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से किसान कम पानी में ही तरबूज की अच्छी फसल प्राप्त कर रहे हैं. तरबूज के आकार और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है. ड्रिप इरिगेशन से फायदा यह हुआ है कि ऊंचाई पर स्थित जमीन में भी आराम से हर पौधे तक पानी पहुंच रहा है. इससे एक बूंद पानी भी बर्बाद नहीं हो रहा है. कभी पानी के कारण खेती नहीं कर पानेवाले किसान आज बेहतर खेती कर रहे हैं. जानकार बताते हैं कि ड्रिप इरिगेशन के जरिये 80 फीसदी पानी की बचत हो रही है. इसके साथ ही किसान जल संरक्षण के महत्व को समझने लगे हैं. साथ ही पानी बचाने के लिए खुद भी पहल करते हैं और दूसरे लोगों को भी जागरूक करते हैं.

यहां ड्रिप इरिगेशन के जरिये ही खेती संभव : उर्मिला देवी
देखिये, यह कैसी जमीन है. कहीं पानी नहीं ठहरता है. यहां सिर्फ बरसाती खेती होती थी, पर अभी देखिये तरबूज कितना अच्छा हुआ है. उकरीद गांव की उर्मिला देवी इतना बताने के साथ अपने खेत में लगे तरबूज को दिखाने लगती हैं. जिस जमीन में तरबूज की खेती हुई है, उसमें बालू और पत्थर भरे हैं. मिट्टी बहुत कम है. सीढ़ीनुमा खेत है. परंपरागत तरीके से खेती करना ऐसी जमीन पर संभव नहीं है, क्योंकि यहां पानी ठहरता नहीं है. ऊंची और पथरीली जमीन है, यहां पानी टिकता नहीं है. ऐसे में खेती करना संभव नहीं था. अब ड्रिप इरिगेशन से मई की कड़ी धूप में भी खेत में नमी रहती है. अभी तरबूज लगे हुए हैं. दाम भी अच्छे मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप इरिगेशन के लिए उपकरण मिले हैं. जेएसएलपीएस का हरसंभव सहयोग मिला है. आज बंजर जमीन पर तरबूजे से अच्छी आमदनी हो रही है.

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ड्रिप से पानी और समय दोनों की होती है बचत : अनीता देवी
उकरीद नकवाटोली की जीवन ज्योति महिला समिति- चार की सदस्य अनीता देवी बताती हैं कि ड्रिप इरिगेशन की सुविधा मिलने से खेती करना आसान हो गया है. खेती में सबसे बड़ी चिंता सिंचाई की होती है. भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन के कारण इलाके का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. इसके कारण मार्च महीने में ही कुएं में पानी सूख जाता है. पानी नहीं होने के कारण खेती करने में परेशानी होती थी. अब ड्रिप इरिगेशन से काफी फायदा हुआ है. अब पहले की तरह पानी की बर्बादी नहीं होती है. अब कुआं भी नहीं सूखता है. हालांकि, अब बोरिंग के जरिये ही सिंचाई करते हैं. अनीता देवी ने बताया कि उन्हें 25 डिसमिल जमीन में माइक्रो ड्रिप इरिगेशन के तहत सिंचाई उपकरण लगाने के लिए जेएसएलपीएस से सहयोग दिया गया.

टपक सिंचाई के लिए ग्रामीणों को करते हैं जागरूक : बालो देवी
उकरीद नकवाटोली की बालो देवी आजीविका कृषक मित्र हैं और ग्रामीणों को आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बारे में बताती हैं. साथ ही खेती की उन्नत तकनीक की जानकारी देती हैं. जेएसएलपीएस द्वारा दी जा रही एमडीआई और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ ग्रामीणों को मुहैया कराया जा रहा है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बालो देवी 15 किसानों को लाभ दिलाने के लिए आवेदन कर चुकी हैं. झारखंड हॉर्टिकल्चर इंटेसिफिकेशन बाइमाइक्रो ड्रिप इरिगेशन प्रोजेक्ट के तहत किसानों को लाभ दिला रही हैं. उकरीद नकवाटोली में अब तक लगभग 100 एकड़ जमीन में ड्रिप इरिगेशन से सिंचाई की जा रही है, जिससे 75 से 80 फीसदी पानी की बचत हो रही है.

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पानी की जबर्दस्त बचत होती है : नारायण महतो
बारीडीह गांव के नारायण महतो बताते हैं कि पहले की अपेक्षा अब पानी की काफी बचत होती है. अपने कुएं को दिखाते हुए नारायण बताते हैं कि पहले एक बार खेत को पटाने पर पूरा पानी खत्म हो जाता था. जब से ड्रिप इरिगेशन के जरिये सिंचाई कर रहे हैं, तब से दो फसल निकालने के बाद भी पानी बरसात तक खत्म नहीं होता है. नारायण दो एकड़ में ड्रिप इरिगेशन के जरिये खेती करते हैं. अभी उनके कुएं में 10 फीट पानी है. अगर वो परंपरागत तरीके से खेती करते, तो उनके कुएं का पूरा पानी एक बार की सिंचाई में ही खत्म हो जाता. नारायण ने बताया कि पहले कुआं सूख जाता था, पर जब से आसपास में डोभा निर्माण हुआ है, तब से कुएं के जलस्तर में काफी सुधार आया है. नारायण कहते हैं कि टपक सिंचाई योजना किसानों के लिए वरदान है.