aadhi aabadi

  • Mar 27 2018 12:49PM

सखी मंडली की दीदियों में आत्मविश्वास बढ़ा

सखी मंडली की दीदियों में आत्मविश्वास बढ़ा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के बरियातु स्थित रिम्स सभागार में अपराजिता सम्मान समारोह आयोजित किया गया. प्रभात खबर अपराजिता सम्मान समारोह में वैसी महिलाओं को सम्मानित किया गया, जो खुद स्वावलंबी बन कर दूसरों को जीने की राह दिखा रही हैं. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं. इस दौरान जेएसएलपीएस द्वारा संचालित महिला समूह की महिलाओं को भी राज्यपाल ने सम्मानित किया


1. पत्रकार दीदी के रूप में है रूबी खातून की पहचान
प्रखंड :
अनगड़ा
जिला : रांची

रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड अंतर्गत महेशपुर गांव की बरकत सखी मंडल की बुककीपर रूबी खातून की पहचान आज पूरे इलाके में पत्रकार दीदी के तौर पर हो रही है. कम्युनिटी जर्नलिस्ट के तौर पर उनकी पहचान बन चुकी है. डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाते हुए रूबी ने टैबलेट दीदी के तौर पर काम करना शुरू किया था. समूह की बैठकों और लेखा-जोखा का डाटा टैबलेट में फीड करने लगीं. इससे काम और आसान हो गया. अब तो कम्युनिटी जर्नलिस्ट बनकर रूबी अपने आस-पास की समस्याएं और सखी मंडल की महिलाओं की सफलता की कहानियां पंचायतनामा के माध्यम से उजागर करने लगीं. रूबी बताती हैं कि जेएसएलपीएस ने जीने का सहारा दिया. समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा. इसी का परिणाम है कि रूबी दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम में अपनी सफलता की कहानी बताने में जरा भी नहीं हिचकिचायीं.

2. कभी लड़की बोल कर हुआ था तिरस्कार, आज समाज को दिखा रहीं आइना
प्रखंड : महेशपुर
जिला : पाकुड़


पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड की रहने वाली सिरीना बीबी ने अपनी मेहनत और लगन से न सिर्फ अनपढ़ होने के दाग को धोया, बल्कि अपने परिवार को गरीबी से भी बाहर निकालीं. सिरीना अपने गांव में सीनियर सीआरपी के तौर पर काम कर रही हैं. अपने आस-पास और दूर-दराज के गांवों में ग्राम संगठन बनाना उनका काम है. समूह से जुड़ीं सिरीना ने समूह की अन्य दीदियों के साथ समूह से 59 हजार रुपये लोन लेकर जमीन लीज पर ली हैं. सवा लाख की लागत से सिंचाई के लिए मोटर पंप खरीदीं. उस पंप का इस्तेमाल समूह की सदस्य सिंचाई के लिए करती हैं. सिरीना बीबी एक बेहतर प्रशिक्षक भी बन चुकी हैं. अब सिरीना ग्रामीण महिलाओं को घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करती हैं. पहले लड़की होने के कारण उनका परिवार और समुदाय ने उनका तिरस्कार कर दिया था. सिरीना बीबी को पढ़ने का बहुत शौक था. वो बहुत आगे तक पढ़ना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक स्थिति को देखते हुए मात्र छठी कक्षा तक ही पढ़ पायीं. उनके अंदर हमेशा कुछ नया और अच्छा करने की ललक भरी रहती थी. साल 2012 में जब झारखंड में एनआरएलएम के तहत काम शुरू हुआ, तब बिहार से सीआरपी की सदस्य उनके गांव में समूह का निर्माण करने लिए आयीं. उनकी सफलता की कहानियां सुनने के बाद सिरीना बीबी बहुत प्रेरित हुईं और अजमेर शरीफ स्वयं सहायता समूह से जुड़ गयीं. समूह में उनके बेहतर कार्यों को देखते हुए उन्हें सक्रिय सदस्य के तौर पर चुना गया. इस दौरान सिरीना को प्रशिक्षण भी मिला. शिक्षा के प्रति समर्पित सिरीना ने इसी बीच मैट्रिक की पढ़ाई भी पूरी कर ली हैं.

3. चलंत ग्रामीण बैंक का दूसरा नाम रुक्मिणी देवी
प्रखंड : रायडीह
जिला : गुमला


गुमला जिला अंतर्गत रायडीह प्रखंड के सिलम गांव की रुक्मिणी देवी बैंक सखी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी हैं. ग्रामीणों का बैंक खाता खोलना, खाता में पैसे जमा करना, निकालना, खाता को आधार कार्ड से जोड़ना जैसे तमाम काम रुक्मिणी अच्छे तरीके से कर रही हैं. रुक्मिणी औसतन 12 लाख रुपये का लेन-देन करती हैं. इसके लिए उन्हें पैसे भी मिलते हैं, जिससे उनकी आमदनी होती है. आज रुक्मिणी पूरे इलाके में ग्रामीणों के बीच बैंकिंग समस्या का हल करने वाली बन गयी हैं. अब लोगों को बैंक जाने से राहत मिल गयी है. रुक्मिणी साल 2015 में देवी महिला सखी मंडल से जुड़ीं. सखी मंडल से जुड़ने से रुक्मिणी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया. समूह में बुककीपर के तौर पर काम करने लगीं. समूह का बैंक लिंकेज होने पर रुक्मिणी ने समूह से एक लाख रुपये का लोन लेकर सूकर पालन शुरू किया. इस काम में उनके पति ने भी सहयोग किया. सूकर पालन से रुक्मिणी को काफी लाभ हुआ और पूरा लोन भी चुकता कर दीं. वर्तमान में रुक्मिणी बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी के रूप में बेहतर काम कर रही हैं.

4. कृषक मित्र बन कर निर्मला अपने परिवार की बढ़ा रहीं आमदनी
प्रखंड : मनोहरपुर
जिला : पश्चिमी सिंहभूम


मनोहरपुर प्रखंड के घाघरा गांव की निर्मला देवी कृषि मित्र हैं. आधुनिक खेती पर जोर देने वाली निर्मला अपने क्षेत्र के 121 परिवारों को आधुनिक खेती का गुर सीखा चुकी हैं. इससे उनलोगों को लाभ भी मिला है. निर्मला अब अपने गांव में आधुनिक तकनीक से खेती के साथ-साथ समुदाय प्रबंधित सतत कृषि करती हैं. वर्षा आधारित खेतों में नये प्रयोग कर सफलता हासिल कर रही हैं. निर्मला के मुताबिक, पहले पारंपरिक खेती पर जोर था. रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल अधिक था. इससे खेती करने में काफी खर्च आती थी और मुनाफा भी उतना नहीं होता था. कृषि मित्र बनने व प्रशिक्षण मिलने के बाद निर्मला ने आधुनिक खेती के लाभ-हानि को जाना और उसके बेहतर परिणाम आने पर गांव के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया.

5. पशु सखी बनकर सीता को मिली नयी पहचान
प्रखंड : रातू
जिला : रांची


रांची जिला अंतर्गत रातू प्रखंड के कनौज गांव की सीता देवी को लोग आज डॉक्टर दीदी के नाम से जानते हैं. वह पशु सखी का काम कर रही हैं. जेएसएलपीएस द्वारा प्रशिक्षण मिलने के बाद सीता छोटे पशुओं का इलाज करने में सक्षम हुईं. धीरे-धीरे इसका लाभ ग्रामीणों को दिखने लगा. गांव में पशुओं की मृत्यु दर में कमी आने लगी. फिलहाल सीता देवी 100 परिवारों के बकरियों का इलाज करती हैं और उन्होंने लगभग 600 बकरियों और मुर्गियों को नयी जिंदगी दी है. इससे सीता देवी का आत्मविश्वास जगा और वो आइसीआरपी के तौर पर भी काम करने लगी. सीता गांव की महिलाओं को समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं. पशु सखी के तौर पर सीता की पहचान इतनी हो गयी है कि अब आस-पास के गांव के लोग भी उन्हें अपने पशुओं का इलाज के लिए बुलाते हैं.